जालौन में लगातार दूसरे दिन चोरों ने दो सूने घरों को बनाया निशाना

उरई। जिले में चोरों के गिरोह हर रोज कहीं न कहीं वारदातें करके पुलिस को खुली चुनौती दे रहे हैं लेकिन घटनाएं रुकने का नाम नही ले रही हैं। जालौन कोतवाली क्षेत्र में बीती रात फिर चोरों ने दो घरों के ताले तोड़कर लाखों का माल पार कर दिया।
बुधवार को देर रात जालौन कस्बे के मोहल्ला गणेशजी में अनिल कुमार अग्रवाल उर्फ अन्नी इलाज कराने के लिए पत्नी के साथ पुणे गये थे। चोरों ने घर सूना होने का फायदा उठाते हुए ताला तोड़ दिया और भीतर घुसकर अलमारी तिजोरी आदि तोड़कर उसमें रखा सामान उठा ले गये। मोहल्ले वालों ने इसकी सूचना फोन से गृहस्वामी को दे दी है पर घर का कोई सदस्य न होने से यह जानकारी नही हो पा रही है कि करीब कितने के सामान की चोरी हुई है।
एक अन्य वारदात में मोहल्ला हृदयशाह बजरिया में चोरों ने अशोक राठौर के सूने मकान को निशाना बनाया और लगभग 35 हजार रुपये का सामान, नगदी सहित ले गये। ध्यान रहे कि इसके एक दिन पहले ही मंगलवार की रात चोर पंजाब नेशनल बैंक के पास एक घर से नगदी सहित लगभग दो लाख रुपये का सामान पार कर ले गये थे फिर भी पुलिस सतर्क नही हुई। पुलिस की इस नाकामी से लोगों में असुरक्षा के साथ आक्रोश भी गहरा रहा है।

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पर्यावरण नियमों की धज्जिया उड़ाकर हो रहा खनन, भाजपा के ही नेता ने किया पर्दाफाश

उरई। जिले में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाकर मौरम खनन शुरू कर दिया गया है। इतना ही नहीं घाटों से ओवरलोड ट्रक भरकर निकाले जा रहे हैं जिससे पहले की तरह ही सड़के क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। यह आरोप किसी विपक्षी नेता का नही है और न ही यह मीडिया की चर्चा है। इसका खुलासा तो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के ही नेता ने जिलाधिकारी को भेजे शिकायती पत्र में किया है। जिसकी प्रतिलिपियां मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव खनन, खनिज मंत्री व अन्य उच्चाधिकारियों को भेजी गई हैं।
अवैध मौरम खनन और ओवर लोडिंग पर रोक लगाने के बड़े-बड़े दावे मौजूदा सरकार ने किये थे। लेकिन जमीनी हकीकत सामने आने पर ये सारे दावे लफ्फाजी साबित हो रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के कदौरा मंडल के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद पाल के शिकायती पत्र को सही मानें तो जिले में पिछली सरकार की तरह ही नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अंधाधुंध खनन शुरू हो गया है।
भाजपा नेता जगदीश प्रसाद पाल ने अपने पत्र में बताया कि जिले में सबसे अधिक मौरम खनन घाट कदौरा क्षेत्र में बसरेही, हेमंतपुरा, पथरेहटा, बड़ागांव, भेड़ी आदि में हैं जहां पर पोकलेंड तथा जेसीबी से ट्रक लोड किये जाते हैं। जबकि एनजीटी के दिशा निर्देशों के मुताबिक मशीनों की बजाय यह कार्य मजदूरों से कराया जाना चाहिए। गत दिनों जब एक ट्रक में हाइटेंशन लाइन छू जाने से एक ड्राइवर की मौत हो गई थी उस समय खुलासा हुआ था कि विद्युत दुर्घटना का शिकार होने वाले ट्रक में पोकलैंड मशीन लदी थी जो कि पास के मौरम घाट पर ले जाई जा रही थी। लेकिन अधिकारियों ने मौरम ठेकेदारों से सांठगांठ के कारण इस खबर को नजरअंदाज कर दिया था।
जगदीश प्रसाद पाल ने कहा है कि जिम्मेदार अधिकारी अवैध रूप से किये जा रहे खनन और ओवर लोडिंग का तमाशा चुपचाप बैठकर देख रहे हैं जिससे उनकी नीयत पर प्रश्न चिन्ह खड़े होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि मशीनों से खनन के कारण बची-खुची बेतवा का भी सत्यानाश हो जायेगा और ओवर लोड वाहन चलने से जोल्हूपुर-हमीरपुर हाइवे भी सुरक्षित नही बचेगा। इसलिए समय रहते इस पर रोक जरूरी है। अब देखना यह है कि प्रदेश सरकार अपनी पार्टी के चैनल से आई शिकायत पर भी कोई कार्रवाई करना गंवारा करती है या नही।

आयुष आपके द्वार के तहत अमखेड़ा में 96 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण

माधौगढ़-उरई। ग्राम अमखेड़ा में गुरुवार को आयुष आपके द्वार कार्यक्रम के तहत प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए शिविर लगाया गया।
इसमें आयुष केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. अभिषेक कुमार ने लगभग 96 बच्चों का परीक्षण किया। बच्चों को मुख्य रूप से दांत, आंख व कीड़े संबंधी समस्यायें थी। डा. अभिषेक कुमार ने मौके पर ही उनको उपचार सुझाया और दवायें भी दीं।

बैंक कर्ज से परेशान किसान ने फांसी लगाकर दी जान

उरई। बैंक कर्ज के चुकता न हो पाने से परेशान किसान ने गुरुवार को अपने खेत पर फांसी लगा ली।
कदौरा थाना क्षेत्र के मदरालालपुर गांव के निवासी बब्बू (50वर्ष) पर स्टेट बैंक की कदौरा शाखा का दो लाख रुपये से अधिक का कर्जा था जिसे पिछले वर्ष फसल अच्छी न होने के कारण वह चुका नही पाया था। इस बीच कर्जमाफी की घोषणा होने पर उसने कई बार बैंक में संपर्क किया। तो उसे बताया गया कि उसके पास 9 एकड़ जमीन है जो कर्ज माफी के लिए निर्धारित सीमा से अधिक है। इसलिए उसे इसका लाभ नही दिया जायेगा।
उधर इस वर्ष भी उसकी फसल अच्छी नही हुई जिससे वह अवसाद की हद तक निराश हो गया। इसी दुस्चिंता में आज वह अपने खेत पर खड़े बबूल के पेड़ पर साफी से गले में फांसी लगाकर लटक गया। बाद में जब लोगों ने उसका शव झूलते देखा तो उसके घर खबर की। जिससे घर में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है।

वृद्ध ने फाँसी लगायी

 

 

उरई । कदौरा थाना क्षेत्र के खुटमिली में वृद्ध ने फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली \ 65 वर्षीय श्याम बाबा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी । बुद्धवार को इसी परेशान में उसने घर के अंदर फाँसी लगा कर आत्म हत्या कर ली। खबर पा कर पुलिस मौके पर पहुँच गई और उसने शव को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया ।

मेघनाथ के मायावाद के आगे सारे वाद फीके, कैसे हो मायावादी राजनीति से समाज में कोई बदलाव

उत्तर प्रदेश सहित आठ राज्यों में बैंकों के एटीएम एकाएक रीत जाने से एक बार फिर खलबली मच गई। भाजपा के कुछ नेताओं ने इसके पीछे कोई गहरी साजिश बताकर दूर की कोड़ी लाने का काम किया है। इंदिरा गांधी के जमाने में सरकार की हर विफलता का ठीकरा बाहरी शक्तियों के सिर पर फोड़ते हुए विपक्ष को उनका मोहरा साबित करने का फैशन बन गया था। जिसमें अति होने पर बाद में इस ट्रेंड का मजाक उड़ाया जाने लगा था। मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य की सरकार चलाने का लंबा तजुर्बा हासिल होने के बावजूद शिवराज सिंह चैहान ने खासतौर से एटीएम खाली होने को लेकर साजिश की थ्योरी प्रतिपादित की जो शेखचिल्ली पन की इंतहा है। जो तथ्य सामने आ रहे हैं उनके मुताबिक यह संकट अचानक पैदा नही हुआ है। लगभग एक पखवारे से एटीएम में कैश की किल्लत चल रही थी जिसने 17 अप्रैल का दिन आते-आते विकराल रूप धारण कर लिया, जब कई राज्यों में आटोमैटिक मशीन में कैश खत्म हो जाने से अफरा-तफरी की हालत पैदा हो गई। यह भी खबर है कि गुजरात की सरकार को एक सप्ताह पहले नगदी संकट पैदा होने का आभास हो गया था। फिर भी इसके समाधान का प्रयास नही किया गया। रिजर्व बैंक सोता रहा जबकि नगदी की आपूर्ति बैंकों में समुचित मात्रा में बनाये रखने की जिम्मेदारी उसकी है। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को हालत के गंभीरता के कारण सामने आकर सफाई देनी पड़ी कि त्यौहारों के कारण नगदी की मांग बढ़ने और मार्च क्लोजिंग के चलते ऐसा हुआ जो एक अंतरिम गतिरोध है। जल्द ही आटोमैटिक मशीनों में पर्याप्त नगदी की व्यवस्था सुचारू हो जायेगी। देखा जाये तो कुल मिलाकर यह नगदी प्रबंधन में सरकार की बड़ी विफलता है। जिसके चलते कई तरह के अंदेशों ने जनमानस को विचलित कर दिया है।
यह अफवाह फैल रही है कि बैंक दीवालिया होने के कगार पर पहुंच गये हैं। जो बुरा कर्जा बाटा गया है उसकी मात्रा बड़ी है जिसके वापस न लौटने से बैंक डूबने के कगार पर पहुंच गये हैं। कुछ लाल बुझक्कड़ों ने कहा है कि बैंकें लोगों की जमा राशि को जबरन पांच साल के लिए ब्याज के साथ एफडी में बदलने का प्लान कर रही हैं। नगदी संकट इसी की देन है। इस तरह बैंकों में जमा लोगों का पैसा उद्योगों और व्यापार को बढ़ाने के लिए दिया जायेगा तांकि देश की आर्थिक स्थितियां दुरुस्त हो सकें। एक ओर बैंकों में जमा पर नगण्य ब्याज दर, दूसरे तरह-तरह के चार्जेज के बहाने जमा मेें मनमानी कटौती और इसके बाद अपने ही पैसों को न निकाल पाने की स्थितियां इससे डरावना माहौल बन गया है। आम लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। बैंक में पैसे रखे तो ब्याज मिलना दूर चार्जेज की कटौती में मूल धन गवां देना पड़ेगा और अगर रकम घर में रखते हैं तो न तो रकम सुरक्षित रहेगी और न वे। लोगों को माहौल बहुत अनिश्चित नजर आ रहा है। नोटबंदी के पीछे कितनी ज्यादा बकवास थी अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है। मोदी सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने जा रही है। इस बीच केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अर्थ नीति के नाम पर बिना ब्रेक की गाड़ी चलाई है जो पता नही कितने बड़े हादसे का शिकार हो जायेगी।
स्रकार चलाना खिलवाड़ का काम नही है। इसलिए सरकार में बहुत दूर तक के परिणामों का अंदाजा लगाने की क्षमता होनी चाहिए तभी वह सार्थक फैसले लागू कर सकती है। अब भाजपा के समर्थक तक ऊब कर यह मानने को मजबूर होने लगे है कि यह जुमलेबाजों की और शोशेबाजों की सरकार है। कुछ न कुछ ऐसा करते रहना जिससे थ्रिल पैदाकर लोगों की टकटकी अपनी ओर बनाई रखी जा सके। यह सरकार का सिद्ध मंत्र है। इसलिए नादान फैसले करना उसकी नियति बन गया है। वह तो सरकार की खुदकिस्मति है कि मुख्य विपक्ष कतई स्मार्ट नही है। इसलिए अंधाधुंध चलने की छूट उसे मिली हुई है। हालांकि इससे देश का भविष्य बहुत चैपट हो रहा है।
बंदी के नतीजे को लेकर माया मिली न राम की हालत है। अभी तक सरकार यह गणना नही करा पाई है कि नोट बंदी से उसकी कितनी मुद्रा वापस लौट आई। अंदेशा तो यह तक जताया जा रहा है कि इस दौरान सरकार द्वारा जारी किये गये कुल कैश से ज्यादा रकम बैकों में जमा हो गई है जो कि एक अजूबा है। काला धन विदेशों से तो वापस लाया ही नही जा सका, नोटबंदी से देश के अंदर जो काला धन है उसे जब्त किये जाने का आशावाद भी थोथा निकला। उल्टे बड़े मगरमच्छो का कालाधन सफेद हो गया। सरकार और बैंकों को इस कदम से कोई लाभ नही हुआ। फायदा हुआ तो केवल बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को जिन्होंने अघोषित कैश को बदलने के लिए तीस प्रतिशत तक कमीशन कमाया। सरकार को उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में कुछ राजनैतिक फायदा जरूर हुआ क्योंकि यहां जो मुख्य विपक्षी दलों के कार्ताधर्ता थे उनके सामने पैसों का संकट पैदा हो गया। नतीजतन खर्च के मामले में वे भाजपा से बहुत पिछड़ गये। उनकी हार की एक बड़ी वजह यह भी रही अब कहा जा रहा है कि एटीएम कैशलैस होने के पीछे एक बार फिर राजनीतिक मकसद है। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने हैं पंचायत से लेकर महापंचायत यानि लोकसभा तक के चुनाव में नगदी बड़ी भूमिका निभाती है। सत्तारूढ़ पार्टी ने कर्नाटक में अभी से इसका बंदोबस्त करने का ताना-बाना बुना है जिसकी व्यूह रचना के चलते बैंकों के एटीएम खाली हो गये।
प्रधानमंत्री भले ही कहें कि आजादी के 70 सालों में इस देश में कुछ नही हुआ। हालांकि इन 70 सालों में जनता पार्टी, भाजपा के सहयोग से संचालित रही संयुक्त मोर्चा और अटल जी की सरकारें भी शामिल हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि आजादी के समय जो विरासत अंग्रेजों से तत्कालीन नेताओं को मिली थी वह बेहद बदतर थी। इन 70 सालों में पूंजीगत संस्साधनों के वितरण और संचालन को बढ़ाया गया। कुतंलों सोना चंद लोगों ने जमीन के अंदर दफन कर रखा था और देश की 90 फीसदी से ज्यादा आबादी भूखी और नंगी बसर कर रही थी। यह सारा धन बाजार में निकल आया। उपभोक्ता क्रांति ने बहुत बड़ी आबादी की जीवन स्थितियां बदल कर रख दीं। हाल के दशक में मनरेगा जैसे प्रयोग ने बीपीएल आबादी तक को उपभोक्ता की हैसियत में खड़ा करके बाजार को जो मजबूती प्रदान की उससे रोजगार सृजन में भी बड़ी मदद मिली लेकिन इसी के समानांतर पूंजीगत केंद्रीय करण के कुचक्र भी चलते रहे हैं जो आम जनता को मिली खुशहाली को छीनने की भूमिका अदा कर रहे हैं। सरकार पैट्रोलियम पदार्थों पर नाजायज भारी शुल्क लगाकर आम जनता को लूटने में लगी है क्योंकि असली कर दाता की गर्दन पकड़ने की कुब्बत उसमें है नही। चंद लोग हजारों-करोड़ कृषि आमदनी दिखाकर सरकार को कर देने के नाम पर अंगूठा दिखा जाते हैं और सरकार उनको बेनकाब करने की बजाय उनकी पर्देदारी में लगी रहती है। गरीबों के लिए हर चीज में सब्सिडी खत्म हो रही है। नगरीय ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार के ढांचागत विकास किया जा रहा है लेकिन इसकी कीमत विकास शुल्क की आड़ में मनमाने ढंग से आम लोगों से वसूली जा रही है। शिक्षा और इलाज जैसी सेवाओं से सरकार ने अपने हाथ खींच लिए है और लोगों को इनके लिए मुनाफाखोर भेड़ियों के आगे धकेल दिया है। जिससे लोग सहूलियत के साथ बुनियादी जरूरतें पूरी करने तक के मोहताज हो रहे हैं।
नोटबंदी का फैसला लागू करते समय सरकार ने ऐसा सब्जबाग दिखाया था जैसे सरकार इसके जरिए इतना कालाधन निकालने में कामयाब होगी कि उसे आम लोगों से अंधाधुंध टैक्स वसूलने की जरूरत नही रह जायेगी। यह कल्पना गलत भी नही थी। कालाधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की इच्छाशक्ति अगर सरकार सचमुच दिखा पाती तब तो तस्वीर ही पलट जाती। ऐसे उपायों से इतनी संपत्ति जब्त की जा सकती है कि सरकार पैट्रालियम पदार्थों पर बेजा शुल्क को तत्काल सीमित कर सके जिससे बाजार में हर चीज की लागत और कीमत जुड़ी हुई है। शिक्षा, स्वास्थ्य को वापस अपने हाथ मेें लेकर लोगों को उनकी बुनियादी जरूरतों के मामले में भी सरकार निश्ंिचत कर सकती है। नैतिक स्तर सुधारने के लिए धार्मिक और संस्कृतिवादी पार्टी होने के नाते उम्मीद की जा रही थी कि भाजपा संयम और सादगी का प्रसार करेगी। भाजपा के नेता बेटे-बेटियों की शादी के मामले में तड़क-भड़क खत्म करने की आचार संहिता चलायेगें। फिजूलखर्ची और दिखावा दो चीजें है जिनकी वजह से लोगों में भ्रष्टाचार की मजबूरी बढ़ी है लेकिन सरकार को समाज में बदलाव लाने की बजाय अधिकतम कार्यकाल का रिकार्ड बनाने की चिंता है। मेघनाथ के बाप रावण के पास इतनी दौलत थी कि उसने लंका में सोने की राजधानी बसा ली थी। इसीलिए मेघनाथ को मायावी प्रपंचों से इतना लगाव था, उसने मायावी प्रपंचों को इतना सिद्ध कर लिया था कि साधन विहीन विरथ रघुवीरा यानी भगवान श्रीराम के छक्के युद्ध में उसके सामने छूट गये थे। माया का प्रभाव अभी भी समाप्त नही हुआ है अब माया के सहारे चुनावी युद्ध जीतने के मंसूबे ही जब अंदर हो तो मूल्यों की राजनीति को अपनाने की सूझ कैसे आ सकती है।

दरिंदों को फांसी की मांग के लिए निकाला कैंडिल मार्च

उरई। विश्व मानवाधिकार परिषद की स्थानीय इकाई के पदाधिकारियों और सदस्यों ने देश में हो रही बच्चियों के साथ होने वाली दरिंदगी का विरोध करते हुए विशाल कैंडिल मार्च निकाला।
यह मार्च टाउनहाल से शहीद भगत सिंह चौराहा होते हुए अंबेडकर चौराहे पर पहुंचा जहां बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष मोमबत्तियां जलाकर सभी ने दो मिनट का सामूहिक मौन धारण किया।
इस अवसर पर विश्व मानवाधिकारी परिषद के राष्ट्रीय सचिव आशीष कौशिक ने कहा कि हम संगठन की ओर से केंद्र सरकार से बच्चियों के साथ दरिंदगी करने वालों को गिरफ्तार कर मृत्यदंड देने की मांग करते हैं। जिलाध्यक्ष व कोषाध्यक्ष ने कैडिंल मार्च में शामिल सभी लोगों का आभार प्रकट करते हुए बताया कि वे शीघ्र ही इस मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति से मिलेगें।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष यूथ प्रकोष्ठ डा. प्रियंक शर्मा, मंडल अध्यक्ष अवधेश निरंजन, उपाध्यक्ष धर्मेश शर्मा, संगठन सचिव सुमन गोस्वामी व भूपेंद्र पटेल, सचिव राहुल पटेल, जिलाध्यक्ष विनय पांचाल, महासचिव आशीष त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध विश्नोई, संगठन सचिव दीपेंद्र प्रताप, सचिव महावीर व अनिरुद्ध प्रताप, नगर अध्यक्ष समीर विश्नोई, महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष विनीता पाण्डेय, नगर अध्यक्ष उपासना परिहार, युवराज पटेल, राधा पांडेय, आशा राजपूत सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।