अपराधियों के समक्ष नत मस्तक है पुलिस प्रशासन-डॉ. सुमंत

* वैश्य एकता परिषद् के राष्टï्रीय अध्यक्ष ने शासन प्रशासन के खिलाफ फूंका बिगुल, धरना प्रदर्शन 24 को उरई में

कोंच—उरई । वैश्य समाज के लोगों के होने बाले उत्पीडऩ को लेकर वैश्य एकता परिषद् ने शासन प्रशासन के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है और आगामी 24 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर विशाल हंगामी धरना प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। परिषद् के राष्टï्रीय अध्यक्ष डॉ. सुमंत गुप्ता ने व्यवस्था पर करारे प्रहार करते हुये कहा है कि जिले में अपराधों की बाढ आई है और घटित घटनाओं को लेकर शासन और प्रशासन कतई गंभीर नहीं है। उन्होंने जहां वैश्य वर्ग के उत्पीडऩ पर पुलिस के मौन को धिक्कारा वहीं नाबालिग बच्चियों और महिलाओं के विरुद्घ होने बाले अपराधों पर चिंता जताते हुये कहा कि ऐसे मामलों में लगता है जैसे समूचा प्रशासन नत मस्तक होकर अपराधियों के पक्ष में खड़ा हो। वैश्य एकता परिषद् नगर इकाई के अध्यक्ष संदीप अग्रवाल के आवास सत्संग भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह बात कही।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि छोटी छोटी बच्चियों को अगवा कर उनके साथ बलात्कार और हत्या जैसी वारदातें कानून और व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। नामजद रिपोर्ट होने के बाद भी अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं होना दर्शाता है कि प्रशासन इन अपराधियों को बचाना चाहता है क्योंकि ऐसे मामलों में महीनों गुजर जाने के बाद भी अब तक गिरफ्तारी का होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल तो खड़े करेगा ही। उन्होंने बताया कि जिले में कुइया रोड पर राजकिशोर गुप्ता की नाबालिग लड़की का अपहरण, गोपालपुरा निवासी सुनील गुप्ता की बेटी का अपहरण, कालपी के पंडौरा में आशाराम गुप्ता के यहां पड़ी डकैती, कोंच में संदीप अग्रवाल की दुकान में हुई आगजनी, उरई निवासी राघवेन्द्र गुप्ता के विरुद्घ फर्जी मुकदमा दर्ज किया जाना आदि ऐसी घटनायें हैं जिनको लेकर वैश्य समाज उद्वेलित है क्योंकि इन घटनाओं में पुलिस लंबा समय गुजर जाने के बाबजूद हाथ पर हाथ धरे बैठी है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं पर वैश्य एकता परिषद् मूक दर्शक की भूमिका में नहीं रह सकती है और इनका प्रतिकार करने के लिये वैश्य समाज के हजारों लोग आगामी 24 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर विशाल धरना प्रदर्शन करेंगे। उस दिन सुबह नौ बजे स्वयंवर गेस्ट हादस से जिलाधिकारी कार्यालय तक रैली निकाल कर इन घटनाओं के अपराधियों की गिरफ्तारी के लिये प्रशासन को चेतायेंगे। इस दौरान संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रजेन्द्र मयंक, प्रदेशीय मुख्य महासचिव युद्घवीर कंथरिया, नगर अध्यक्ष संदीप अग्रवाल, भाजपा नगर अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, विशाल गिरवासिया, पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि आनंद अग्रवाल, मनीष भदौरिया, अभिषेक सर्राफ, राहुलबाबू अग्रवाल, केके गहोईविवेक गहोई, श्यामविहारी तीते, राजकुमार आदि मौजूद रहे।

 

Advertisements

क्रय केन्द्रों पर उजागर हुई किसानों के साथ होने बाली लूट,विधायक और एसडीएम के निरीक्षण के दौरान केन्द्र छोड़ कर रफूचक्कर हुये कई केन्द्र संचालक व पल्लेदार

 

* किसानों ने लिखित शिकायत की कि पल्लेदारी के नाम पर बसूले जा रहे हैं पचास से साठ रुपये तक

कोंच–उरई । सरकारी गेहूं खरीद केन्द्रों पर किसानों की जेबों पर पडऩे बाले डाके की बात उस वक्त सामने आ ही गई जब इलाकाई विधायक मूलचंद्र निरंजन और एसडीएम सुरेश सोनी निरीक्षण के लिये एक साथ क्रय केन्द्रों पर पहुंचे। विधायक और अधिकारियों को आया देख कई केन्द्र संचालक अपने केन्द्र छोड़ भाग खड़े हुये, साथ ही किसानों का माल तौल रहे पल्लेदार भी मौके से नदारत हो गये। किसानों ने एसडीएम और विधायक को बताया कि उनके साथ केन्द्रों पर खुली लूट की जा रही है। तमाम किसानों ने लिखित में भी शिकायत दी कि पल्लेदारी के नाम पर उनसे पचास से लेकर साठ रुपये तक की अबैध बसूली की जा रही है। विधायक ने तत्काल ऐसे केन्द्रों के खिलाफ कार्यवाही करने और उन्हें बंद कराने के लिये एडीएम को फोन पर कहा।

 

 

इन सरकारी गेहूं क्रय केन्द्रों पर किसानों के साथ होने बाली अनियमितताओं की कहानी कोई नई नहीं है। इन केन्द्रों के बहाने तमाम अनर्गल काम करने का लाइसेंस इन केन्द्र संचालकों के हाथों में आ जाता है जिसके चलते ये केन्द्र संचालक मनमानी पर आमादा रहते हैं। दिन में औपचारिकता निभाने के लिये थोड़ा बहुत माल किसानों का लिया जाता है और रात के अंधेरे में व्यापारियों के माल तौलने के लिये कांटे लग जाते हैं। मजदूरी के नाम पर किसानों की जेबें हल्की की जाती हैं और जब किसान आवाज उठाने की कोशिश करता है तो उसका माल नहीं तौलने की धमकियां देकर उनका मुंह बंद करा दिया जाता है। ऐसी तमाम शिकायतें मिलने के बाद गुरुवार को इलाकाई विधायक मूलचंद्र निरंजन ने खुद हालातों का जायजा लेने का मन बनाया। उन्होंने एसडीएम सुरेश सोनी को भी अपने साथ लिया और निकल पड़े केन्द्रों की कारगुजारी की छानबीन करने। जैसे ही विधायक और एसडीएम का काफिला इन क्रय केन्द्रों पर पहुंचा वहां खलबली मच गई। एफसीआई, नैफेड, एग्रो, आरएफसी, पीसीएफ, मां शारदा आदि केन्द्रों पर काम ठीक ठाक मिला लेकिन खरीदे गये माल की उठान नहीं होने से जगह की दिक्कत इन केन्द्र संचालकों ने बताई। एलएसएस जुझारपुरा तथा क्रय विक्रय में वारदाना नहीं होने से गेहूं खरीद बंद हो गई है। विधायक और एसडीएम जैसे ही वे मातृ कृषि उत्पादन केन्द्र पर पहुंचे, हड़कंप मच गया और वहां के सभी जिम्मेदार लोग तथा पल्लेदार मौके से भाग गये जिसके चलते दाल में काले की आशंका बलवती हो गई लेकिन वहां इनके सवालों का जबाब देने बाला कोई नहीं था। वहां मौजूद किसानों रामशरण चांदनी, कौशल विरगुवां, रामजी अंडा, सुल्तानखां आदि किसानों ने उन्हें लिखित में शिकायत दी कि उनसे पल्लेदारी के नाम पर पचास से लेकर साठ रुपये तक की अबैध बसूली की जा रही है। इस स्थिति को लेकर विधायक ने एडीएम से फान पर वार्ता करके केन्द्र के खिलाफ कार्यवाही करने और उसे तत्काल बंद करने के लिये आदेश करने को कहा। एसडीएम ने भी अपनी रिपोर्ट बना कर एडीएम को भेजी है। किसानों की परेशानी को देखते हुये एसडीएम ने केन्द्र संचालकों से कहा कि जिनके यहां ज्यादा माल है वे रात में तौलाई कर सकते हैं ताकि किसानों को परेशान न होना पड़े।

 

 

कार्यवाही होगी या यूं ही लुटते रहेंगे किसान

क्रय केन्द्रों पर मची धांधलियों को लेकर किसानों की ओर से की गई लिखित शिकायतों के बाद भी किसानों को अंदेशा है कि इन केन्द्रों के खिलाफ शायद ही कोई कार्यवाही हो। उनकी आशंका में इस लिये भी बल है कि पिछले दिनों अलस्सुबह तौलाई होने की शिकायत मिलने पर अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे थे लेकिन जैसे गये थे वैसे ही बिना कोई कार्यवाही बापिस भी लौट गये। हालांकि बाद में इस बाबत जब एसडीएम से पूछा गया था तो उन्होंने भी गड़बड़ी की आशंका से इंकार नहीं किया था और जांच जारी रखने की बात कही थी किंतु नतीजा ढाक के तीन पात से आगे नहीं बढा था। गुरुवार को भी विधायक और एसडीएम ने सब कुछ अपनी आंखों से देखा भी और किसानों की जुबानी सुना भी, इसके बाद भी अगर कार्यवाही नहीं होती है तो किसानों को लुटने से कोई नहीं बचा सकता है।

 

 

 

यदि आरोप सही हुये तो निरस्त होगा केन्द्र-विधायक

गुरुवार को गेहूं क्रय केन्द्र के निरीक्षण के दौरान किसानों ने विधायक मूलचंद्र निरंजन के समक्ष अबैध बसूली की खुली शिकायत की है जिसे लेकर विधायक भी गंभीर हैं। उन्होंने कहा है कि किसानों ने जो आरोप लगाये हैं उनकी जांच कराई जा रही है, यदि अबैध बसूली के आरोप सही सिद्घ होते हैं तो केन्द्र के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही तो होगी ही, केन्द्र को निरस्त भी कराया जायेगा।

 

ग्रामीणों का हंगामी प्रदर्शन, रेल ट्रैक किया बाधित, रेल विभाग की तानाशाही के खिलाफ ग्राम सतोह के लामबंद ग्रामीणों ने किया उग्र प्रदर्शन

 

कोंच—उरई । रेल विभाग की तानाशाही के खिलाफ गुरुवार को सतोह गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन किया और कोंच-एट रेल ट्रैक पर आ डटे। ग्रामीणों ने एट से कोंच आ रही शटल ट्रेन को रोक दिया जिससे तकरीबन पंद्रह मिनट बिलंब से ट्रेन चल सकी। सतोह के एक किसान सौरभ की जमीन को बिना मुआवजा दिये रेल विभाग द्वारा हथिया लिये जाने को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी सामने आई है। मौके पर पहुंची एट पुलिस ने ग्रामीणों को समझा बुझा कर शांत कराया तब ट्रेन अपने गंतव्य को जा सकी। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन भी एसओ एट चंद्रशेखर दुवे को दिया।

 

 

तहसील कोंच के ग्राम सतोह में गांव के बाहर से रेल लाइन निकली है जिस पर एट-कोंच शटल का परिचालन होता है। रेल विभाग वहां मानव रहित क्रॉसिंग संख्या 169 सी बंद कर वहां अंडर पास बनाने की जुगत में है जिसके चलते विभाग के अभियंताओं ने वहां खुदाई का काम लगा दिया। जिस जगह रेल विभाग खुदाई करवा रहा है वहां सतोह निवासी सौरभ पटेल का गाटा संख्या 640 रकवा 4.5610 खेत पड़ता है। सौरभ का आरोप है कि बिना उसकी सहमति लिये रेल विभाग ने उसके खेत में अतिक्रमण कर लिया है और खुदाई कर दी है जिससे नाली भी क्षतिग्रस्त हो गई है जिससे आपास के खेतों में भी पानी भरने की आशंका बलवती हुई है। राजस्व विभाग ने भी जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को दी है जिसमें लेखपाल की जांच आख्या इस बात की तस्दीक करती है कि गाटा संख्या 640 व 597 में रेल विभाग बिना मुआवजा दिये अंडरपास बना रहा है। इस संबंध में उसने अधिकारियों को कई बार लिखित रूप से भी अवगत कराया लेकिन तानाशाही रवैया अपनाये रेल विभाग ने उसकी शिकायतों को दरकिनार करते हुये जबर्दस्ती अपना काम जारी रखा हुआ है। रेल विभाग के इस रवैये से खफा गांव के सैकड़ों लोग गुरुवार की दोपहर रेल ट्रैक पर आ डटे और एट से कोंच जा रही शटल ट्रेन को रोक दिया। सूचना पर एसओ एट चंद्रशेखर दुवे दल बल के साथ पहुंच गये और ग्रामीणों को किसी तरह समझा बुझा कर ट्रैक खाली कराया तब कहीं जाकर ट्रेन तकरीबन पंद्रह मिनट की देरी से गंतव्य की ओर रवाना हो सकी।

 

 

राजस्व विभाग की भी नहीं मानी-सौरभ

 खेत मालिक सौरभ पटेल का कहना है कि रेल विभाग राजस्व विभाग के निर्देशों को भी मानने से इंकार कर रहा है। उसका कहना है कि उसने जिलाधिकारी महोदय के यहां भी शिकायत की थी जिस पर कोंच एसडीएम द्वारा की गई जांच में उसके खेत में रेल विभाग द्वारा अतिक्रमण करना बताया गया था और 25 मार्च को वहां काम कर रहे रेल विभाग के कर्मचारियों को एसडीएम ने फोन पर वार्ता कर काम रोक देने तथा ग्रामीणों से वार्ता कर समस्या का निदान करने के बाद ही काम शुरू करने के निर्देश दिये थे लेकिन उन्होंने एसडीएम के निर्देश भी नहीं माने।

 

भाजपा में दलितों का दिल जीतने की कवायद

दलितों को उपेक्षित करके उन्हें हैसियत में रहने का सबक पढ़ाते-पढ़ाते उत्तर प्रदेश सरकार अब उनका दिल जीतने के जतन में लग गई है। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष के रूप में रिटायर आईपीएस बृजलाल की नियुक्ति और अंबेडकर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल को अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम का अध्यक्ष बनाने का जो कदम उठाया गया है उसके निहितार्थ समझे जाने चाहिए। देश और प्रदेश में लगातार ऐसी घटनाएं हुईं हैं जिससे दलित भाजपा से कुपित हैं। इससे भारी राजनैतिक नुकसान का अंदाजा भी अब भाजपा नेतृत्व को डराने लगा है इसलिए भाजपा में खलबली मची हुई है।
डैमेज कंट्रोल के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के भी पेंच कसे हैं। संभावना है कि उक्त दोनों नियुक्तियों के अलावा उत्तर प्रदेश में दलितों के लिए अभी कुछ और सकारात्मक फैसले किये जायेगें। केंद्रीय स्तर पर पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को बहाल करने के लिए अध्यादेश लाने का एलान भी रामविलास पासवान के माध्यम से हो चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर खुलेआम यह जाहिर करने की कोशिश की है कि उनके प्रधानमंत्री बन पाने में न किसी संघ प्रमुख का एहसान है और न श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा को इसका कोई श्रेय है। संघ और भाजपा की परंपरागत विचारधारा अटल बिहारी बाजपेयी के बाद लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और राजनाथ सिंह आदि पर ही जाकर अटकती उन तक पहुंचने का सवाल ही नही था क्योंकि सर्वोच्च कार्यकारी पद देने के मामले में उस विचार धारा का दायरा तय है। लेकिन लोकतंत्र वर्ण व्यवस्था से नही चलता। भाजपा को अब समझमें आया है कि लोकतंत्र में पार्टी के अस्तित्व के लिए बहुजन की भावनाओं के अनुरूप अपने को ढालना होगा। वह पुराना जमाना था जब उत्तर प्रदेश में इस बाध्यता को नजर अंदाज कर दिया गया था और कल्याण सिंह को हटाकर जातिगत कुलीनता के आधार पर मुख्यमंत्री बिठाने की कोशिश की गई थी।
इसके तहत रामप्रकाश गुप्ता और उनके बाद राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री बनाकर भक्ति काल को दोहराने के प्रयास में यह पार्टी सफल नही हो पाई। इसके चलते यह हुआ कि भाजपा के खिलाफ बहुजन इस कदर भड़क गया कि पार्टी लंबे समय के लिए उत्तर प्रदेश में मुख्य मुकाबले से ही बाहर हो गई।
उधर भाजपा हिंदुत्व की रट लगाकर और मजबूत चेहरों को सामने रखकर भी केंद्र में स्पष्ट बहुमत का लक्ष्य हासिल नही कर पा रही थी। जिसकी नितांत आवश्यकता उसे अपने मौलिक एजेंडे को लागू कर पाने के लिए थी। (हालांकि यह एजेंडा तो अपने दम पर सरकार बनाने के बाद भी भाजपा अभी तक लागू नही कर पाई है।) चुनावी दौड़ में अपनी सीमा के पीछे भाजपा के रणनीतिकारों के सामने एक ही निष्कर्ष उभर कर सामने आया कि इस दौर में जब बहुजन को नेतृत्व का चस्का लग चुका है तो जब तक इस मामले में उसकी इच्छापूर्ति नही की जायेगी तब तक उसकी योजनाएं कारगर नही हो पायेगीं।
पूर्व में सामाजिक परिदृश्य के समानांतर जो राजनैतिक परिदृश्य था उस पर एक निगाह डाल लें। संघ और भाजपा में सोशल इंजीनियरिंग का नारा सबसे पहले गोविंदाचार्य ने दिया था। आज वह नारा गुल खिला रहा है। लेकिन गोविंदाचार्य इतिहास के कूड़ेदान में फेकें जा चुके हैं। गो कि उन्होंने समय से पहले यह बात कर दी थी। बतर्ज लोहिया लोग उनकी बात सुनेगें लेकिन उनके मरने के बाद। गोविंदाचार्य अभी जीवित है और कामना है कि दीर्घायु हों पर उनके साथ लोहिया जी की यही कहावत चरितार्थ हुई। उस समय संघ और भाजपा में वर्ण व्यवस्थावादी दृष्टिकोण हावी था इसलिए गोविंदाचार्य की ‘हरकत’ संघ और भाजपा के महंतों को रास नही आई और उनकों निर्वासन में धकेल दिया गया। लेकिन सच्चाई तो सच्चाई है। बाबा साहब और महात्मा गांधी में वर्ण व्यवस्था को लेकर बहुत तीखा शास्त्रार्थ होता रहा था। गांधी जी वर्ण व्यवस्था में ही दलितों की बेहतरीय की संभावनाएं तलाशने के पक्ष में थे लेकिन बाबा साहब का कहना था कि दलितों को स्वयं को करुणा की वस्तु के रूप में देखा जाना स्वीकार्य नही है। उन्हें आत्म निर्णय का अधिकार चाहिए जिसमें नेतृत्व का अधिकारी भी शामिल है। अटल जी ने जब भारतीय जनता पार्टी का गठन किया था तो उन्होंने पहले चुनाव में पार्टी की ओर से जगजीवन राम को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने का फैसला लिया था।
पर भाजपा सत्ता को लेकर जिस माडल में विश्वास करती थी उसमें यह दुस्साहस स्वीकार्य नही हो सकता था। इसलिए 1980 के चुनाव में भाजपा की भद पिट गई।
राजीव गांधी ने सबसे पहले सार्थक अंबेडकरवादी पहल की जब उन्होंने स्थानीय निकाय और पंचायती राज में जाति के आधार पर आरक्षण के फार्मूले को लागू कर दिया। इससे जमीनी स्तर पर दलितों और अन्य पिछड़ों में नेतृत्व के गुण और महत्वाकांक्षाऐं पनपना शुरू हुईं। बाबा साहब के आत्म निर्णय के दर्शन की सार्थकता को इस कदम से एक नया आयाम मिला। उनके बाद वीपी सिंह आये उन्होंने बाबा साहब को मरणोपरांत भारत रत्न दिया। क्योंकि उन्हें भारत के नव निर्माण में बाबा साहब की विचारधारा का महत्व समझमें आ गया था। अंबेडकरवाद इसके बाद देश की राजनीति के केंद्र में आ गया। दूसरा धमाका उन्होंने मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के जरिये किया। इसका प्रभाव जैसे-जैसे प्रकट हुआ हासिये पर रहे तबकों के उत्थान और महत्वाकांक्षा को तेज अग्रसरता मिली। इसलिए मोदी आज अगर प्रधानमंत्री बन पाये हैं तो बाबा साहब, राजीव गांधी, वीपी सिंह और गोविंदाचार्य के बीजारोपण की बदौलत हालांकि उनकी मजबूरी है कि वे बाबा साहब का नाम तो ले सकते हैं पर राजीव गांधी, वीपी सिंह और गोविंदाचार्य का नही।
इस दृष्टि से देखे तो परिस्थितियां कितनी बदल चुकी हैं लेकिन संघ और भाजपा में अभी भी रूढ़िवादियों का बोलबाला है जो बदलते जमाने की तस्वीर को नही देख पा रहे। उन्हें शूद्रों को आत्म निर्णय का अधिकार स्वीकार्य नही है। उन्हें शूद्रों में दास और भक्ति भाव का स्वरूप ही सुहाता है। इस माइंड सैट के कारण भाजपा में जानबूझकर दलितों में वे नेता उभारे जाते हैं जिनकी जुबान नही होती। चुनावी जरूरतों के लिए भाजपा ने रामविलास पासवान, उदित राज और कौशल किशोर जैसे दलित नेताओं का सहारा जरूर ले लिया था लेकिन सुग्रीव की बजाय बालि परंपरा के दलित नेताओं के प्रति सतर्कता की वजह से उसने इनकों हाशिये पर ही रखा गया। दलितों के साथ आस्था के नाम पर अत्याचार की नई श्रंखला इस दौर में शुरू की गई। जिसको लेकर खुला विद्रोह तत्काल इसी कारण नही हुआ क्योंकि भाजपा में मुखर नेताओं को काबू में रखने का मजबूत बंदोबस्त था। उत्तर प्रदेश में अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग में वर्ण व्यवस्थावादी चश्में की वजह से दलितों और ओबीसी को उपेक्षित कर दिया गया। नेता वह होता है जो लोगों से अपना अनुसरण करवा सकता हो। भीड़ के सामने समर्पण करके चलने वाला असली नेता नही हो सकता। मोदी में वास्तविक नेता के गुण मौजूद है लेकिन इसके बावजूद शुरू में पार्टी में अपने ज्यादा बिगाड़ से बचने के लिए वे रूढ़वादियों की मूढ़ताओं को सहते रहे। उनकी अगुवाई में हिंदुत्व की ऐसी छतरी तैयार हुई जिसके नीचे दलित भी सहर्ष आ जुटे थे। यह सुनियोजित ढंग से किया गया था क्योंकि ब्राह्मणों के बाद दलितों के समर्थन से विहीन हो जाने पर ही कांग्रेस मुक्त भारत के अपनी पार्टी के मंसूबे को वे कामयाब कर सकते थे। पर जब उन्होंने देखा कि रूढ़वादियों के कारण खेल बिगड़ रहा है और दलित हिंदुत्व की छतरी से छिटक कर जाने लगा है जिसके नतीजे में कांग्रेस को गुजरात में नया जीवन मिलने के आसार उजागर हुए तो वह हस्तक्षेप के लिए तत्पर हो गये। इस बीच उत्तर प्रदेश में रूढ़िवाद का प्रकोप ज्यादा रहा जिससे न केवल दलित बल्कि पूरा बहुजन भाजपा के विरोध में लामबंद हो गया। सपा-बसपा की दोस्ती में कुछ लोगो को मायावती के नेतृत्व में केंद्र में गठबंधन सरकार के गठन के आसार दिखने लगे। मोदी को एहसास हो गया कि यह फैक्टर भी भाजपा के समर्थन के क्षरण में अपनी भूमिका अदा करेगा। इसलिए उन्होंने नई पहलकदमी की मुद्रा साध ली है।
भाजपा में जो मूल दलित सांसद और विधायक हैं उनमें ज्यादातर निष्तेज हैं क्योंकि दलितों को पैदाइशी हीन साबित करने के लिए भाजपा में जानबूझकर कूड़ा माल को ही तर्जी दी जाती है। इसी सिद्धांत के तहत भाजपा बाहर से जिन दबंग दलित नेताओं को अपने यहां लाई थी उन्हें कोई अवसर देती नही थी तांकि सामाजिक यथास्थिति के लिए किसी तरह का जोखिम पैदा न हो सके। पर लगता है कि नई पहलकदमी में मोदी इसमें बदलाव ला रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बृजलाल और निर्मल के समायोजन से इसकी झलक मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को बेहतर पुलिसिंग के लिए प्रकाश सिंह से तो सलाह लेने की फर्सत थी लेकिन उनसे बहुत ज्यादा प्रोफेशनल और कामयाब रहे बृजलाल उन्हें अपने पूर्वागृह के नाते कभी याद नही आये थे। उनकी बुद्धि का यह दोष शायद भाजपा हाईकमार द्वारा दूर किया जायेगा। उत्तर प्रदेश में उक्त नियुक्तियां भले ही प्रतीकात्मक हैं लेकिन इससे भाजपा के शासन-प्रशासन की दिशा बदलने के संकेत उभरे हैं जो सकारात्क लक्षण हैं।

विद्युत विभाग के वसूली कैंप में तार-तार हुई गरिमा, मोबाइल पर बतियाते रहे जेई

उरई। विद्युत वितरण उपखंड जालौन के अंतर्गत सिरसाकलार विद्युत उपकेंद्र पर लगाये गये वसूली कैंप में विभाग के जिम्मेदारों के उच्छृंखल रवैये से इसकी गरिमा तार-तार नजर आई।
इस अवसर पर उपखंड में तैनात अवर अभियंता जितेंद्र को टेबिल पर बैठकर मोबाइल पर बतियाते हुए कैद किया गया। वसूली शिविर में ऐसे ही अस्त-व्यस्त माहौल की वजह से उपभोक्ताओं को परेशान रहना पड़ा। बताया जाता है कि जितेंद्र यादव सपा के समय से इसी उपखंड में तैनात है लेकिन निजाम बदल जाने के बावजूद अपना रवैया बदलने को तैयार नही हैं। उन पर अपने सजातीय लाइनमैनों के माध्यम से क्षेत्र के सीधे-साधे लोगों को डरा धमका कर वसूली करवाने का आरोप भी आम है।

संदेश यात्रा निकाल गांव-गांव में फंूका स्वच्छता का मंत्र

उरई। ग्राम स्वराज अभियान के तहत विकास खंड रामपुरा के पचनद धाम से प्रारंभ कर गई ग्राम पंचायतों में गुरुवार को स्वच्छता संदेश यात्रा निकाली गई। जिसमें भारी संख्या में ग्रामीणों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
आधा सैकड़ा मोटर साइकिल और चार पहिया वाहनों की इस विशाल रैली में तीन सैकड़ा समाजसेवियों ने कंजौसा, भिटौरा, जगम्मनपुर, हमीरपुरा, हुसैपुरा जागीर, उदोतपुरा, छौना और मानपुरा आदि गांव में पहुंचकर ग्रामीणों को खुले में शौंच न जाने और घर में ही शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया। ग्रामीणों से घर के बाहर स्वच्छता रखने और नालियों में कचरा न डालने की अपील भी की गई।
जिला पंचायत राज अधिकारी राजबहादुर सिंह, रामपुरा के खंड विकास अधिकारी आदित्य कुमार, एडीओ पंचायत अंगद सिंह राजावत, भाजपा नेता विजय द्विवेदी, जगम्मनपुर के प्रधान राहुल मिश्रा, पूर्व प्रधान अनूप कुमार झा, सत्येंद्र पाल सिंह चंदेल, भिटौरा के प्रधान वीर सिंह यादव, मानपुरा के बृजेंद्र सिंह, हिम्मतपुर के रामू यादव, जाजेपुरा के राजकुमार राठौर, हमीरपुरा के चंद्रशेखर और जिला पंचायत सदस्य बृजेश प्रजापति मुख्य रूप से रैली में शामिल थे। जगम्मनपुर के बाजार में दुकानदारों ने स्वच्छता संदेश यात्रा का भव्य स्वागत किया। ग्राम मानपुरा में यात्रा का समापन किया गया।

सड़क हादसों में एक दर्जन घायल

उरई। गुरुवार को दो अलग-अलग दुर्घटनाओं में लगभग एक दर्जन लोग घायल हो गये।
सुबह उरई में गोविंद स्वीट हाउस के पास एंबुलेंस से टकरा जाने के कारण बाइक पर सवार तीन लोग व एक राहगीर घायल हो गया। बताया गया है कि पुलिस की एक जीप घटना के समय गुजर रही थी जिससे मोटर साइकिल चला रहे युवक का हैंडिल टकरा गया। इसी बीच सामने एंबुलेंस आ रही थी। हड़बड़ाहट में युवक एंबुलेंस से भिड़ गया। हादसे में युवक उसके साथ बैठी वृद्धा, किशोरी और एक वृद्ध राहगीर घायल हो गया जिन्हें बाद में दूसरी एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। युवक और किशोरी की हालत गंभीर है।
उधर कालपी में दोपहर में एक ट्रक ने पीछे से ट्रैक्टर में टक्कर मार दी जिससे उसमें सवार आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गये। इनमें रघुराज और ज्वाला प्रसाद की हालत गंभीर बतायी गई है जो कि जयरामपुर के निवासी हैं। दोनों गंभीर घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। इस बीच ट्रक का चालक और हैल्पर मौके से भाग निकला जबकि ट्रक को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।